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भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने घोषित किया है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 368 के अन्तर्गत मौलिक अधिकार उसकी संशोधन करने की शक्ति से बाहर हैं। यह निर्णय गोलकनाथवाद (केस) में दिया गया था। संविधान के 24वें और 25वें संशोधन के द्वारा संसद को मौलिक अधिकारों में संशोधन करने का अधिकार पुनः दिया गया था।