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परिवार को बच्चों की प्रथम शाला कहा गया है। अच्छे परिवार के बच्चे अच्छे व्यक्ितत्व के ही होते हैं। बच्चों को देखकर उनके परिवार के स्वरूप की सहज अनुभूति की जा सकती है। एक अंग्रेज लेखक का कहना है- 'बालक पारिवारिक अनुकरण से ही अपने स्वभाव को निर्धारित और विकसित करता है'।
बच्चों के सामान्य विकास तथा व्यावहारिक शिक्षा में सर्वाधिक योगदान परिवार का ही होता है। “बालक नागरिकता का सुन्दरतम पाठ माता के चुम्बन और पिता के दुलार से सीखता है। इसीलिए परिवार को बालक की प्रथम पाठशाला कहा जाता है।